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बौद्ध धम्म ध्वज की स्थापना

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प्रतिकार

:–हम बौध्द
के जीवन मे अहम महत्व रखने वाले पंच
शील ध्वज को करीब 140साल के आस
पास का इतिहास है।समूचे बौद्ध जगत मे
वैश्विक(विश्व)श्रद्धा व शांती का प्रतीक
समझा जानेवाला ध्वज 28एप्रिल1885
मे फहराया गया19 वी शताब्दी मे जब
श्रीलंका के पूनरुत्थान का काम पूरी
ताकत के साथ चल रहा था तब बौध्दो
का धम्म ध्वज नही था.बौद्ध धम्म के
बिखरे दिलो को जोडने के लीए उन्हे एक
ता सूत्र मे बाधने के लीए धम्म का संदेश
सदैव उचा रखने के लीए बुद्ध के दान,
सदाचार, अहिंसा, सत्य एव अप्रमाद
(स्मृती)का(कोलंबो श्रीलंका)मे आदरणी
य गूणानंद महाथेरो इनके कर कमलो
द्ववारा फहराया गया।इस ध्वज की संक
ल्पना एव रचना के शिल्पकार पूज्य
अनाकारीक धर्मपाल,आदरणीय गूणानंद
महास्थविर, सूमंगल महास्थविर तथा
विश्वविख्यात बौध्द पंडीत हैरी ओलकोट
थे।इसके पश्चात आदरणीय गूणपाल इन
कि अध्यक्षामे श्रीलंका मे संपन्न हूआ
‘विश्व बंधूत्व परिषद’के उद्घाटन समारोह
के अवसर पर धम्म ध्वज को वैश्विक
(संपूर्ण विश्व)बौद्ध धम्म ध्वज के रूप मे
विधीवत स्विक्रुत किया गया।
1)निला रंग:-समानताका(प्रेम का)और
व्यापकताका प्रतीक(2)निला रंग:-पवि
त्रता व करूणा का प्रतीक(3)लाल रंग:-
गतीशीलता और द्रूढ संकल्प शौर्य और
साहस का प्रतीक(4)सफेद रंग:-शांती
और शूध्दता का प्रतीक(5)केसरी रंग:–
त्याग,करुणा और सेवा का प्रतीक.

बातम्या आणि जाहिरातकरीता संपर्क साधावा - 7038636121

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