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शाम हाटेल राष्ट्रीय स्मारक घोषित करे डॉ भीमराव गोटे …..

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      नागपूर। ।।।।
प्रतिकार……चरणदास नगराळे  ।।।।

नागपूर के बर्डी स्थित ‘शाम हाॅटेल’ यह वो स्थान है जहा डा. बाबासाहेब आंबेडकरने धर्मांतर के समय ११ से १८ आक्टो.१९५६ वास्तव्य किया था. इतनाही नही; बल्की दि. १५ आक्टो. १९५६ को कुछ लोगोंको इसी शाम हाॅटेल मे भी बौध्द धर्म की दिक्षा भी दी थी. अत: इस वास्तू को ‘धम्म दीक्षा स्मृती भवन’ घोषित करने की घोषणा २८ साल पहले की थी. नागपूर महानगर पालिका ने भी ३० एप्रिल २०१२ को एक ठराव पास किया था. उसे भी ७ साल हो गये है. परंतु आजतक ये स्मारक नहीं बन सका. यह हमारे देश के शासन/प्रशासन के कार्यकी गतिशीलता है.
अब इस ऐतिहासिक वास्तूके समक्ष पिछले १२ सालसे प्रो. डाॅ. भीमराव गोटे और उनके कुछ साथी १४ एप्रिल, ६ डिसेंबर, बुध्द जयंती और धम्म चक्क पबत्तन दिन; हर साल ४ दिन बुध्द वंदना नियमित रूपसे ग्रहन करते है.
आगामी दि. ८ आॅक्टो. २०१९ को भी सुबह ११ बजे से रात १० बजे तक बुध्द वंदना होगी. नागपूरमे आनेवाले सभी बौद्ध अनुयायी को नम्र निवेदन है; इस बर्डी स्थित ऐतिहासिक वास्तू के दिन ‘धम्मचक्क पबत्तन’ को किसी समय मात्र १० मिनट रूककर बुध्द वंदना करें. यह भी एक श्रद्धा स्थान है. यहा पर भी बाबासाहेब ने बौद्ध धर्म की दीक्षा दी.
मध्य प्रांतके तत्कालीन मुख्य मंत्री पं‌. रविशंकर शुक्ल ने बाबा साहेब के महापरिनिर्वाण के समय (६ डिसेंबर १९५६) नागपूर शहरमे बाबासाहेब के नाम पर राष्ट्रीय स्मारक बनानेकी घोषणा की थी. १९९०-९१ मे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंग ने भी जन्म शताब्दीके उपलक्षपर बाबा साहेब के नाम पर राष्ट्रीय स्मारक बनानेकी घोषणा की थी. परंतु उनकी सरकार गिरा दी गयी थी.
आज ६५ साल बितने के बाद भी आज तक स्मारक नही बना. इस नागपूर शहरमे कवी सुरेश भट के नाम से, स्वामी विवेकानंद के नाम से स्मारक घोषणा होते ही तुरंत स्मारक बन जाता है. परंतु हम संघटीत नही होने के कारण बाबासाहेब के नाम से ६५ सालमे स्मारक नही बना.
ऊन जातीयवादी शासनकर्ताओं को तो बिलकूल शर्म नही आती, पर जो खुदको आंबेडकरवादी समझने वाले लोगोंको भी…

जब जब हमने इस शाम हाॅटेल का (जो दुसरी दिक्षाभूमी है) मुद्दा ऊठाया; तब तब हमारे कुछ भाईयोंने पटवर्धन ग्राऊंड की बात चलायी. क्यों क्या हम सचमुच सच्चे….

इस वास्तूके कारण ही बाजूमे जो आनंद टाॅकिज की इमारत है वो बरसोसे खाली पडी है. फिर भी हमारे भाईयोंके समझमे नही आता.
इस ऐतिहासिक वास्तूमे आज एक दारू की दुकान है. इसी दारू की दुकानके सामने पिछले १५ सालसे हम लोग बुध्दं सरणं गच्छामि… कहते है और बाकी शौकीन लोग दारूकी बोतल लेते है. कुछ लोग तो वही पर बोतल खोलते है. यह बात शासन कर्ता ओंको भलीभांती मालुम है. पर कुछ शर्म होती तो…

आज तक यहाँ देशके अनेक महानुभावोने भेंट दी है. देश विदेशके अनेक बौद्ध भिक्खू भी यहाँ भेट कर चुके हैं. हर साल यह अभियान चल रहा है. परंतु शासन प्रशासन को संकोच मात्र नहीं. इस मुद्धेपर डाॅ. गोटे ने सब आजी/माजी मंत्री, महापौर, आमदार, खासदार आदी लोगोंसे बात की. ऊन सभीने ये स्मारक होनेकी बात स्विकार की. दि. २९ एप्रिल २०१२ के रात १२ बजेतक तत्कालीन उपमहा पौर श्री संदीप जाधव के घरमे बैठकर ऊन्हे पुरा इतिहास बताया. महानगर पालिका की विशेष महासभा मे पुछे जानेवाले संभावित प्रश्नोंके उत्तर क्या देने चाहिए, इन बातोंपर उनसे चर्चा की और दुसरे दिन ३०.४.२०१२ को विशेष महा सभा मे प्रस्ताव पारित किया गया. उसके बाद दुसरे तिसरे दिन हमारे बेशर्म नेता महापौरके कार्यालयमे जाकर फोटो खिचवाकर न्युज पेपर मे छपवाने लगे. तब भी हम मौन रहे.
आज तक हमने कभी किसी से आवाहन नहीं किया. क्यों की स्मारक बनानेसे जनता की कोई समस्या हल नही होनेवाली. अत: इसमे जनता की शक्ती नहीं लगाने चाहते. बस हर सालमे चार दिन (१४ एप्रिल, ६ डिसेंबर, बुद्धजयंती और धम्मचक्क पबत्तन दिन) को वहांपर बुध्द वंदना करते है.
बस बुध्द वंदना होती रहनी चाहिए. अत: आप सभी बौद्ध जनोसे नम्र अनुरोध है की; अपने अपने समूह के साथ वहांपर जाकर बुध्द वंदना करें.
भव तु सब्ब मंगलं!
धन्यवाद, जयभीम!
डॉ. भीमराव गोटे
९८२२२३५०२९

प्रतिकार न्युज

 

 

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