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अब जब औसतन 10 हजार के करीब कोरोना के केस आ रहे फिर भी पूरे महाराष्ट्र में प्रतिबंध क्यों ?

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Pratikar News

Maharashtra : केवल 8 जिलों में मिला

‘डेल्टा प्लस वेरिएंट’, 
 
फिर भी पूरे महाराष्ट्र में प्रतिबंध क्यों ?
मुंबई, 28 जून : देशभर में कोरोना वायरस के नए मामलों में लगातार कमी देखी जा रही है, लेकिन इस बीच कोविड-19 के डेल्टा प्लस वैरिएंट ने चिंता बढ़ा दी है और इसके सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं। डेल्टा प्लस वैरिएंट को केंद्र सरकार ने ‘चिंताजनक स्वरूप’ (वीओसी) के रूप में टैग किया गया है और अगर मामले ज्यादा बढ़ते हैं तो महाराष्ट्र सरकार को राज्य में एकबार फिर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
हालही में महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इसे लेकर अहम जानकारी दी थी। स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने राज्य में डेल्टा प्लस के मरीजों का जरूरी ख्याल रखने के निर्देश दिए थे। बता दें कि जब महाराष्ट्र में औसतन हर रोज़ 25 हजार मरीज सामने आ रहे थे, तब महाराष्ट्र में अनलॉक मुहिम शुरू की गई थी। अब जब औसतन 10 हजार के करीब कोरोना के केस आ रहे हैं तब राज्य में एक बार फिर आज से प्रतिबंध कड़े कर दिए गए हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में जगह-जगह व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। कोल्हापुर, इचलकरंजी जैसी जगहों में व्यापारी दुकान ग्यारह बजे तक खोलने पर अड़ गए हैं और प्रशासन की सुनने को तैयार नहीं है। कोल्हापुर उन पांच जिलों में से एक है जहां कड़क लॉकडाउन लगा है, यानी संपूर्ण बंदी।
अब यह जानने की कोशिश करते हैं कि चंद जिलों में डेल्टा प्लस वेरिएंट पाए जाने पर संपूर्ण महाराष्ट्र को तीसरी चरण में क्यों रखा गया है। दरअसल कोरोना संक्रमण घटने पर भी प्रतिबंध और नियम कड़े करने का पहला कारण डेल्टा प्लस वेरिएंट को बताया जा रहा है। लेकिन, एक और अहम कारण है। वो है दूसरी लहर के वक्त मिली अमरावती से सीख। जनवरी महीने में पूरे महाराष्ट्र में कोरोना खत्म होने का भ्रम था। लेकिन, फरवरी में अमरावती और अचलपुर में कोरोना संक्रमण बढ़ने लगा। सरकार ने सिर्फ अमरावती में लॉकडाउन लगाया। बाकी सारे जिले शुरू रखे गए थे। परिणाम यह हुआ कि मार्च में भारत में जो दूसरी लहर आई, उसकी शुरुआत महाराष्ट्र से हुई।
इससे समँझे –
महाराष्ट्र में अब कोरोना की तीसरी लहर का खतरा बताया जा रहा है और कुछ जिलों में अमरावती जैसी स्थिति ही पैदा हो गई है। ऐसा किस तरह से हुआ है, यह समझने की ज़रूरत है। फरवरी महीने की शुुरुआत में यानी दूसरी लहर से पहले अमरावती में पॉजिटिविटी रेट 10 प्रतिशत के आस-पास था। आज रत्नाागिरी और सांगली जिले में पॉजिटिविटी रेट 10 प्रतिशत है। सातारा जिले में पॉजिटिविटी रेट 9.50 प्रतिशत है। कोल्हापुर में भी पॉजिटिविटी रेट 8 प्रतिशत है। ये चारों जिलों के आंकड़े पूरे महाराष्ट्र में प्रतिबंध और नियमों के कड़े होने की वजह बने हैं।
अभी की स्थिति में देश में डेल्टा प्लस वेरिएंट के 48 मरीज पाए गए हैं। इनमें से 21 महाराष्ट्र में मिले हैं। ऐसे में जो ग़लती कोरोना की दूसरी लहर की वजह बनी, वही गलती दोहरा कर तीसरी लहर को निमंत्रण देने जैसा काम सरकार नहीं कर सकती है। फिलहाल ब्रिटेन में चौथी लहर की शुरुआत हुई है। इसके पीछे डेल्टा प्लस वेरिएंट को कारण बताया जा रहा है। इसके ठीक दो महीने बाद यानी सेप्टेंबर महीने में भारत में भी कोरोना की तीसरी लहर आने के दावे किए जा रहे हैं। इसीलिए आज के वक्त कोरोना संक्रमण कम होने के बावजूद सरकार किसी भी तरह का रिस्क लेने  को तैयार नहीं है।

बातम्या आणि जाहिरातकरीता संपर्क साधावा - 7038636121

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